घर की मुर्गी दाल बराबर
हिन्‍दुस्‍तान के कवि और हिंदी
बाज़ार में हिंदी और हिंदी का बाज़ार
सरकती लाश और नष्ट होता नाश्ता
जनगणना में हिंदी
हिंदी में उर्दू ले आएँ तो ज़रा अदब से
क्या हिंदी सचमुच एक खलनायक है?
कितनी फैलती, कितनी सिकुड़ती हिंदी