हमारा पैनल

Kritika Agrawal


"वर्ष के हिन्दी शब्द' की चयन प्रतिक्रिया मेरे लिए एक बहुमूल्य अनुभव रहा। शब्द का चयन कठोर प्रक्रिया के माध्यम से पारित, गहन चर्चाओं के कई दौर से हो कर किया गया है। मेरा यह विश्वास है की आक्स्फ़र्ड यूनिवर्सिटी प्रेस द्वारा यह हिन्दी भाषा के लिए अनोखी पहल हिन्दी भाषा के समृद्ध इतिहास को आने वाली पीढ़ियों के लिए उपलब्ध करवाने में एक प्रमुख पड़ाव पार करने समान है। जिस उत्साह से लोगों ने इस गतिविधि में अपने सुझावों द्वारा योगदान दिया है, वह इसकी प्रासंगिकता और आवश्यकता को दर्शाता है। निश्चित रूप से यह एक सराहनीय पहल है।"

Saurabh Dwivedi

"हिंदी में हर बरस नए नए जाबड़ शब्द जुड़ रहे हैं. कभी राजनीतिक तो कभी किसी और वजह से पुराने शब्द भी नए सिरे से चमक पा रहे हैं. ऐसे में साल भर सुर्खियां सजाने वाले शब्दों से होकर गुजरने का मौका मिला, ऑक्सफर्ड हिंदी वर्ड ऑफ द ईयर के चलते. मुझे पूरा भरोसा है कि ये आयोजन हर साल और बड़ा होगा. लोग इसके साथ जोश खरोश दिखाते हुए जुड़ेंगे. आखिर ये लोग ही तो हैं जो किसी भी शब्द की जिंदगी और जवानी तय करते हैं.
सौरभ द्विवेदी"
संपादक
दी लल्लनटॉप

Mallika Ghosh

"मेरे लिए ऑक्सफ़ोर्ड डिक्शनरीज़ की पहली बार होने वाले ‘वर्ष के हिंदी शब्द’ पहल का हिस्सा बनना गौरव की बात है। मुझे यह करने में भरपूर आनंद मिला। जब हमारे पास एंट्रीज़ आयीं तो इस जीवंत भाषा में इस साल के चर्चित शब्दों को देख कर बहुत अच्छा लगा जो कि नए शब्दों को हमेशा अंगीकार करती है और जहां पुराने शब्द भी समय के साथ नई परिभाषा ग्रहण करते हैं।"

Namita Gokhale


“2017 को परिभाषित करते उन शब्दों को ढूंढना बेहद मज़ेदार और प्रेरक अनुभव रहा।”

Dr Poonam Sahay

" यूरेका! मुझे मिल गया! लगा कि जैसे सीप से मोती मिल गया! खोजने में असीम आनंद एवं सुखद अनुभूति का अहसास हुआ! "