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हिंदी भाषा का डिजिटलाइजेशन - वेबिनार

इस वेबिनार में आप पाएंगे जानकारी हिंदी भाषा के ऑनलाइन उपयोग, डिजिटल हिंदी में हुई वृद्धि और इसके प्रभावों के बारे में। हिंदी भाषा के डिजिटल होने से युवा पीढ़ी में इस भाषा को लेकर एक रुचि और उत्साह के बारे में। कुछ आंकड़े इस बात की पुष्टि करने के लिए की भारत में अधिकांश लोग इंटरनेट का उपयोग अपनी भाषा में कर रहे हैं और मातृभाषा को प्राथमिकता दे रहे हैं। ऑनलाइन हिंदी की दुनिया में जो सामाजिक बदलाव आए हैं उस पर भी यह रौशनी डालता है। डिजिटल हिंदी की वजह से शिक्षण व अन्य पेशों में बदलाव और नए अवसरों के बारे में भी इस वेबिनार में चर्चा है। यह वेबिनार हिंदी भाषा को डिजिटल रूप से संरक्षित करने के लिए ऑक्सफ़ोर्ड ग्लोबल लैंग्वेज (OGL) द्वारा की गई पहल को भी कवर करता है।


वक्ता के बारे में:

श्री विवेक त्रिपाठी ओ. यू. पी. के साथ हिंदी भाषा विशेषज्ञ हैं। वर्तमान में वे आकाशवाणी, मुंबई में उद्घोषक हैं और पिछले कई वर्षों से भाषा सलाहकार के रुप में कार्यरत हैं। उनके पिछले वर्षों का अनुभव प्रशिक्षक, ब्लॉगर, अनुवादक, भाषाविद्, लेखक आदि कई भूमिकाओं में विस्तृत है। उन्होंने हिंदी में एम. ए. किया है और एग्जाम हिंदी नामक एक यूट्यूब चैनल भी चलाते हैं

संक्षिप्त में वेबिनार चर्चा:

 

भाषा के डिजिटलाइजेशन का क्या अर्थ होता है?

भाषा का डिजिटलाइजेशन या डिजिटलीकरण का सीधा-सामान्य अर्थ इसका प्रयोग “डिजिटल स्थल के लिए करना” या “डिजिटल स्थल पर करना” होता है। तो यदि आप फेसबुक में पोस्ट लिखते हैं, ट्वीटर में ट्वीट करते हैं, या ब्लॉगिंग-साइट्स पर ब्लॉग लिखते हैं, तो आप भाषा के डिजिटल-माध्यम का प्रयोग करके भाषा का डिजिटलीकरण कर रहे हैं। यह बहुत ही रोमांचक विषय है। इस विषय पर मैंने ऑक्सफ़ोर्ड के साथ मिलकर ऑक्सफ़ोर्ड हिंदी लिविंग डिकशनरी का पहला वेबिनार किया जिसमें हमने कई मुद्दों पर विचार-विमर्श किया और शामिल सभी श्रोताओं के सवालों पर भी चर्चा की।

इस वेबिनार में हमने निम्न विषयों पर बात की :-

  1. डिजिटलाइजेशन (डिजिटलीकरण) और डिजिटाईजेशन (अंकरूपण)  का क्या अर्थ होता है?

हमने इसके अंतर्गत डिजिटलीकरण और अंकरूपण के आपसी संबंध के बारे में बातें की| इसके बारे में विस्तार से आप यहाँ इस ब्लॉग द्वारा पढ़ सकते हैं| हमने यह समझा कि क्या डिजिटल रूपांतरण से हिंदी प्रभावित हुई है या नहीं?

  • अनुवाद, ब्लॉगिंग और सोशल मीडिया

अनुवाद और अनुवाद संबंधित सेवाएं किस प्रकार हिंदी में की जा सकती है- इसे समझने के लिए आप अनुवाद संबंधित सेवाओं पर मेरा यह ब्लॉग पढ़ सकते हैं| इसके अतिरिक्त हिंदी-अंग्रेज़ी अनुवाद कैसे किया जाना चाहिए, इस पर भी मेरे इस ब्लॉग को पढ़ कर आप समझ सकते हैं| 

पिछले 50 वर्ष की तुलना में और भारत की अन्य भाषाओं की तुलना में हिंदी अनुवाद, सोशल मीडिया और ब्लॉगिंग- तीनों दर्जों पर अव्वल नज़र आती है| अत: हिंदी को भारत की प्रतिनिधित्व-भाषा (Representative language) माना जाता है| परन्तु कुछ जो जुड़े सवाल हैं, जैसे कि :-
1. क्या हिंदी भारत की राष्ट्र भाषा है?
2. क्या हिंदी भारत की राज भाषा है?
3. क्या हिंदी को संविधान से मान्यता प्राप्त है?

इन तीनों विषयों पर मैंने लेख लिखे हैं, जो आप विषय पर क्लिक करके पढ़ सकते हैं | 

  • जाल-स्थल में और जाल-स्थल से कैसे हिंदी की लोक-भाषाओं का विस्तार हुआ ?

इन्टरनेट एवं सोशल मीडिया के आने से हिंदी के कई परिपेक्ष्य सामने आए जैसे कि हिंदी का विकास लोगों को परिमाणात्मक रूप से दिखने लगा और गूगल
सर्च-मात्रा में बढ़ोतरी का मापन सामने आया| 

यह था डिजिटलीकरण का सीधा परिणाम, परन्तु इसके अतिरिक्त कुछ प्रच्छन्न (hidden) परिणाम भी देखने को मिले जैसे कि हिंदी की बोलियों को सामने आने का, अपना डिजिटल विस्तार करने का अवसर भी मिला| लोग अपनी-अपनी भाषा में ब्लॉग लिखने लगे, फेसबुक पेज बनाने लगे (और आपस में लड़ने भी लगे कि हम सबसे बड़े हैं….. हाहाहा)| इस पर विस्तार से मेरा एक लेख आप इस ब्लॉग में पढ़ सकते हैं|

  • हिंदी का मानकीकरण

ध्यान रखें मानकीकरण भाषा की शुद्धता नहीं है (कि क्लिष्ट हिंदी प्रयोग करते जाओ तो वह मानक-हिंदी हो जाएगी), अपितु यह “भाषा का क्या सही-रूप है” वह बताता है| जैसे कि “भगवान प्रकट हुए” का मानक रूप “भगवान प्रकट हुए ” ही है|

मानकीकरण यह होता है कि आप “भगवान प्रकट हुए”  को “भगवान प्रकट होगी” न बोलें| अत:, मानकीकरण न केवल भाषा के सही-रूप पर बात करता है बल्कि इसकी वर्तनी पर भी विचार करता है|

मानकीकरण से जुड़े सभी बिन्दुओं पर मैंने हिंदी का मानकीकरण (स्टैण्डर्ड हिंदी/ उर्दू) ब्लॉग पर चर्चा की है|

  • साहित्यिक रूपांतरण और अन्य-रूपांतरण

आज हिंदी बस अनुवाद से नहीं पढ़ी या व्यवसाय में लाई जा सकती है, बल्कि हिंदी का साहित्यिक रूपांतरण भी किया जा सकता है, जो रचनात्मक बनने का
सबसे-बढ़िया तरीका है| क्या कभी सोचा था मुक्तक छंद के प्रस्तोता (inventor) सूर्यकान्त त्रिपाठी निराला
की यह संकल्पना (concept) कि मुक्तक-छंद कैसा होता है और कैसे लिखा जाता है, आज “ओपन-माईक” बन कर पूरे भारत में छा जाएगा| 

हिंदी का साहित्यिक रूपांतरण क्या होता है और कैसे हिंदी ने डिजिटल-माध्यम में कहानियों में, गायकी में या अन्य विधाओं पर अपने पाँव पसारे, आप इसके बारे में इस ब्लॉग में पढ़ सकते हैं|

  • हिंदी भाषा शिक्षण और वैज्ञानिकता

भाषा ट्रेनर बनने के लिए दो चीज़ें बहुत आवश्यक है :-

  • एक विद्यार्थी जिसे भाषा सीखने की इच्छा हो और
  • दूसरा ट्रेनर होने के सभी आवश्यक कौशल

बल्कि मैं यह कहूँगा कि  भाषा का कौशल होना बस काफी नहीं है (कि आपको हिंदी आती है तो आप हिंदी पढ़ा भी सकते हैं), आपको शिक्षण-पद्धति (teaching methodology) के वैज्ञानिक तरीकों पर काम करना भी आना चाहिए| आप शिक्षण-विधियों को विस्तार से मेरे इस ब्लॉग को पढ़ कर जान सकते हैं|

  • हिंदी भाषा में रोजगार

हिंदी में BA करना या MA करना या M.Phil., PhD करना – इन सभी डिग्रियों के बाद हिंदी में रोजगार के लिए क्या करना चाहिए? इस प्रश्न का जवाब मैंने अपने इस लेख में दिया है|

हिंदी भाषा के डिजिटलीकरण के कारण आज हिंदी में अपेक्षा से कहीं ज़्यादा रोज़गार के अवसर दिखाई देते हैं| हिंदी में लगभग दो-तिहाई से ज़्यादा रोजगार में हाथ आज़माने के बाद, मैंने  आप से अपने अनुभव अपने ब्लॉग में साझा किए हैं|

मेरी यानी कि ऑक्सफ़ोर्ड हिंदी में भाषाविद के रूप में विवेक त्रिपाठी और ऑक्सफ़ोर्ड हिंदी की डिजिटल मार्केटर स्वाति लूथरा के बीच क्या-क्या संवाद हुए, आप निम्न विडियो के माध्यम से सुन कर, अपने हिंदी के ज्ञान को बढ़ा भी सकते हैं और साथ में सवालों के जवाबों पर अपनी सहमती / असहमति भी कमेंट के माध्यम से दर्ज कर के हमें बता सकते हैं।


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